रामू नाम का एक ग़रीब किसान अपने खेत में अपने एक वफ़ादार कुत्ते लालिया के साथ रहता था। लालिया बहुत ही समझदार और निडर था। एक दिन रामू अपनी पत्नी के साथ बाहर गया और घर में उसका छोटा बेटा पालने में सो रहा था। लालिया को घर की रखवाली के लिए बाहर बैठाया गया था।
थोड़ी ही देर में एक बड़ा काला सांप कमरे की ओर रेंगता हुआ आता दिखाई दिया। लालिया ने सांप को देखा और अपनी बहादुरी दिखाते हुए उस पर हमला कर दिया। भयंकर लड़ाई के बाद लालिया ने सांप को मार डाला, लेकिन सांप के ख़ून से लालिया का मुँह पूरी तरह सन (रंग) गया।
जब रामू घर वापस लौटा, तो लालिया दौड़कर दरवाज़े पर खड़ा हो गया। लालिया के मुँह पर ख़ून देखकर रामू घबरा गया और उसने सोचा कि इस वफ़ादार कुत्ते ने ही उसके बेटे पर हमला कर दिया है। गुस्से में आकर उसने पास ही पड़ा एक बड़ा पत्थर कुत्ते पर दे मारा, जिससे वफ़ादार लालिया की मौत हो गई। जब रामू कमरे के अंदर गया, तो उसका बेटा सही-सलामत ज़िंदा था और पास में सांप मरा हुआ पड़ा था। रामू को अपने जल्दबाज़ी में लिए गए फ़ैसले पर बहुत भारी पछतावा हुआ।