एक पहाड़ी जंगल के बीच से एक छोटी सी नदी बहती थी। उस नदी को पार करने के लिए लकड़ी का एक बहुत सँकरा (पतला) पुल बना हुआ था। वह पुल इतना सँकरा था कि उस पर से एक समय में केवल एक ही जानवर गुज़र सकता था।
एक दिन, नदी के दोनों किनारों से एक-एक बकरी आमने-सामने पुल पर चढ़ गई। दोनों पुल के ठीक बीच में पहुँच गईं। अब पुल से वापस लौटना भी संभव नहीं था और एक-दूसरे के बगल से गुज़रना भी असंभव था।
शुरुआत में दोनों एक-दूसरे की तरफ देखकर गुस्से से सिर हिलाने लगीं और सींग भिड़ाकर लड़ने की तैयारी करने लगीं। लेकिन अगर दोनों लड़तीं, तो दोनों नीचे नदी के तेज़ बहाव में गिर जातीं। थोड़ी देर बाद काली बकरी को समझदारी सूझी। उसने कहा, “अगर हम लड़ेंगे तो दोनों डूबकर मर जाएँगे। इससे अच्छा मेरे पास एक बढ़िया विचार है।”
काली बकरी पुल पर पेट के बल लेट गई। उसने दूसरी बकरी से कहा, “तुम धीरे से मेरे शरीर पर पैर रखकर आगे निकल जाओ।” दूसरी बकरी ने उसकी बात मान ली और बहुत सावधानी से काली बकरी के ऊपर से चलकर दूसरे पार पहुँच गई। इसके बाद काली बकरी भी खड़ी हुई और अपने रास्ते चली गई। इस प्रकार आपसी समझदारी से एक बड़ी मुसीबत टल गई।