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सोने का हिरण और दयालु राजा (The Golden Deer and the Kind King)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: सुनहरा हिरण, राजा ब्रह्मदत्त

सोने का हिरण और दयालु राजा (The Golden Deer and the Kind King)
અક્ષરનું માપ:

वाराणसी के जंगल में एक बेहद सुंदर सुनहरे रंग का हिरण रहता था। उसके सींग हीरे की तरह चमकते थे। वह हिरण अपने झुंड का मुखिया था और अत्यंत दयालु स्वभाव का था। उस समय वाराणसी में राजा ब्रह्मदत्त का शासन था, जिन्हें हिरणों का शिकार करने का बहुत शौक़ था।

राजा रोज़ जंगल में शिकार के लिए आते थे, जिससे कई हिरण मारे जाते थे। सुनहरे हिरण ने राजा के साथ एक समझौता किया कि रोज़ बारी-बारी से केवल एक ही हिरण राजा के रसोईघर में शिकार के रूप में जाएगा, ताकि पूरे झुंड में अफ़रा-तफ़री न फैले। राजा इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए। एक दिन एक गर्भवती हिरणी की बारी आई। वह अपनी जान बचाने के लिए रोने लगी।

हिरणी पर दया खाकर सुनहरा हिरण स्वयं शिकार बनने के लिए राजा के महल में चला गया। राजा ब्रह्मदत्त ने जब सुनहरे हिरण को देखा, तो वे आश्चर्यचकित हो गए और इसका कारण पूछा। सुनहरे हिरण की इस उदारता और त्याग की बात सुनकर राजा की आँखें खुल गईं। उन्होंने उसी क्षण से जंगल में सभी पशु-पक्षियों के शिकार पर रोक (प्रतिबंध) लगा दी।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

दया और अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। दूसरों की रक्षा के लिए स्वयं का त्याग करना एक महान गुण है।