करसन नाम का एक किसान था, जो बहुत ही लालची और आलसी था। वह कभी खेत में काम करना नहीं चाहता था। एक दिन उसे एक साधु महाराज ने एक सुंदर मुर्गा दिया। साधु ने कहा, “करसन, यह एक जादुई मुर्गा है। यह जब भी तड़के (सुबह-सुबह) बाँग देगा, तब इसके पंखों में से सोने का एक सिक्का गिरेगा।”
करसन ने मुर्गे को घर में बहुत संभालकर रखा। रोज़ सुबह मुर्गा बाँग देता और करसन को सोने का एक सिक्का मिल जाता। करसन थोड़े ही समय में बहुत धनी बन गया और गाँव में ब्याज का धंधा करने लगा। लेकिन उसके दिल में लालच बढ़ता ही गया। उसने सोचा, “रोज़ सिर्फ़ एक ही सिक्का मिलता है! अगर मैं मुर्गे का पेट चीर दूँ, तो मुझे सारे सिक्के एक साथ मिल जाएँगे।”
एक रात करसन ने लालच में आकर मुर्गे को मार डाला। जब उसने देखा, तो मुर्गे के पेट में कोई सोने के सिक्के नहीं थे! वह एक सामान्य मुर्गा ही था, जिसे साधु ने अपनी शक्ति से जादुई बनाया था। करसन को अपना रोज़ मिलने वाला सोने का सिक्का भी गँवाना पड़ा और लालच के कारण वह फिर से ग़रीब बन गया।