गाँव के अत्यंत सुंदर, शांत, हरे-भरे और प्राकृतिक वातावरण में ‘रिया’, ‘देव’ और ‘रोहन’ नाम के तीन पक्के दोस्त रहते थे। तीनों बच्चे गाँव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पाँचवीं कक्षा में साथ पढ़ते थे और रोज शाम को गाँव के विशाल बरगद के पेड़ के नीचे खेलकूद और पढ़ाई साथ में ही करते थे। 15 अगस्त यानी भारत का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस आने वाला था। पूरे गाँव और स्कूल में स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए अभूतपूर्व उत्साह, खुशी और उमंग का माहौल बना हुआ था।
एक दिन शाम को रिया, देव और रोहन गाँव के पंचायत भवन के पास बैठकर स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम के बारे में चर्चा कर रहे थे। बातचीत के दौरान उनकी नज़र गाँव के मुख्य चौराहे पर गई। उन्होंने देखा कि गाँव की गलियों में जगह-जगह प्लास्टिक की थैलियाँ और कचरा बिखरा हुआ था, नाली के पास गंदगी थी और गाँव के पार्क के सुंदर फूल वाले पौधे पानी न मिलने के कारण सूख रहे थे।
देव ने बहुत ही उदास और चिंतित होकर कहा, “दोस्तों! हम हर साल 15 अगस्त के पावन दिन पर स्कूल जाकर साफ़-सुथरी ड्रेस पहनते हैं, तिरंगा फहराते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हैं। लेकिन क्या अपने गाँव और आसपास के माहौल को गंदा रखकर स्वतंत्रता दिवस मनाना सही है? यदि हमारा गाँव ही स्वच्छ नहीं होगा, तो हमारी आजादी अधूरी रह जाएगी।”
रिया ने तुरंत देव की बात का समर्थन करते हुए कहा, “तुम बिल्कुल सही और काम की बात कह रहे हो देव! सच्ची देशभक्ति केवल मंच पर भाषण देने या बैनर लगाने तक सीमित नहीं है। अपने देश, गाँव और मोहल्ले को साफ़ रखना, अधिक से अधिक पेड़ लगाना, पानी और बिजली की बचत करना तथा समाज में गरीबों व असहायों की मदद करना ही असली देशभक्ति है। इस बार हमें 15 अगस्त का उत्सव कुछ अलग और देश के काम आने वाले तरीके से मनाना चाहिए!”
रोहन ने खुशी से उछलकर कहा, “हाँ दोस्तों! हम स्कूल और गाँव के सभी बच्चों को इकट्ठा करते हैं और एक ‘बाल देशभक्त दल’ का गठन करते हैं!”
अगली ही सुबह तीनों दोस्तों ने स्कूल के प्रधानाध्यापक जी और अध्यापकों की अनुमति लेकर गाँव के लगभग 30 उत्साही बच्चों को जोड़ा। उन्होंने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 15 अगस्त से पहले के तीन दिनों में वे पूरे गाँव में एक व्यापक ‘स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण अभियान’ चलाएँगे।
बच्चों ने अपने-अपने घरों से झाड़ू, तसला, फावड़ा, दराती और कूड़ेदान उठा लिए। रिया और उसकी सहेलियों ने पंचायत परिसर और मंदिर के आसपास के प्रांगण की सफाई शुरू कर दी। देव और रोहन की टीम ने गाँव की मुख्य सड़कों पर फैले प्लास्टिक, पन्नियों और सूखे पत्तों को बटोरकर कूड़ेदान में एकत्र किया। सभी बच्चों ने मिलकर कचरे के सही निस्तारण के लिए गाँव के बाहर गड्ढे भी तैयार किए।
इतना ही नहीं, बच्चों ने अपनी गुल्लक के बचाए हुए पैसों से गाँव के पार्क और सड़कों के किनारे लगाने के लिए नीम, पीपल, बरगद, आम और गुलमोहर के 50 छोटे पौधे खरीदे। बच्चों ने कड़ी धूप में मेहनत करके गड्ढे खोदे, पौधे लगाए और उनमें नियम से पानी डाला।
बच्चों के इस अद्भुत सेवाभाव, अटूट लगन और देशप्रेम को देखकर गाँव के बड़े-बुजुर्ग हैरान रह गए। गाँव के लोगों में भी चेतना जागी और वे भी बच्चों की मदद के लिए हाथ बटाने लगे। गाँव के सरपंच जी पंचायत भवन की बालकनी से बच्चों को काम करते देखकर भावुक हो गए। उन्होंने उपसरपंच से कहा, “देखिए! इन नन्हे बच्चों ने आज हम सभी गाँव वालों को देशभक्ति और नागरिक कर्तव्यों का असली पाठ पढ़ा दिया है।”
अंततः 15 अगस्त का पावन और शुभ प्रभात आ गया। पूरे गाँव में एक अनूठी खुशबू और देशभक्ति की लहर छाई हुई थी। पंचायत भवन के विशाल प्रांगण में ध्वजारोहण का मुख्य समारोह आयोजित किया गया। गाँव के सभी नागरिक, महिलाएँ, वृद्ध और बच्चे स्वच्छ वस्त्र पहनकर उपस्थित हुए। गाँव का प्रांगण आज दर्पण की तरह चमक रहा था।
गाँव के सरपंच जी ने स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का सम्मानपूर्वक रोहण किया। जैसे ही तिरंगा गगन में शान से फहराया, वैसे ही पूरा परिसर “जन गण मन…” के ओजस्वी राष्ट्रगान से गूँज उठा। तिरंगे से गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा हुई और सभी ने एक स्वर में “भारत माता की जय!” और “वंदे मातरम!” के नारे लगाए।
ध्वजारोहण समारोह के बाद सरपंच जी ने मंच से माइक संभाला और गद्गद कंठ से कहा, “आदरणीय गाँव वासियों! इस वर्ष हमारे गाँव में स्वतंत्रता दिवस का सच्चा और असली उत्सव इन छोटे देशभक्त बच्चों ने मनाया है। इन्होंने केवल नारे नहीं लगाए, बल्कि अपने हाथों से गाँव को स्वच्छ बनाया है और 50 नए पौधे लगाकर पर्यावरण को नया जीवन दिया है। इसलिए ग्राम पंचायत की ओर से इस वर्ष का ‘सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार’ रिया, देव, रोहन और उनकी पूरी बाल टीम को दिया जाता है!”
पूरे गाँव ने खड़े होकर जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का अभिनंदन किया। सरपंच जी ने बच्चों को तिरंगा सम्मान पट्टा, शील्ड और प्रेरणादायक पुस्तकें भेंट कीं।
मंच से रिया, देव और रोहन ने गाँव वालों से भावुक अपील की, “हमारी आजादी बहुत अनमोल है। यदि हम अपने देश भारत को सचमुच विश्व गुरु बनाना चाहते हैं, तो हमें प्लास्टिक का त्याग करना होगा, गंदगी बंद करनी होगी और पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। यही हमारे अमर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।”
यह कहानी हमें यह अमर संदेश देती है कि देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर लड़ने से ही पूरी नहीं होती। हम अपने दैनिक जीवन में ईमानदार बनकर, स्वच्छता रखकर, पौधे लगाकर और कमजोरों की मदद करके भी सच्चे देशभक्त बन सकते हैं।