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ऊंट और सियार (The Camel and the Jackal)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: ऊँट लालू, सियार चकू

ऊंट और सियार (The Camel and the Jackal)
અક્ષરનું માપ:

एक नदी के किनारे लालू ऊँट और चकू सियार (लोमड़ी) रहते थे। दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। नदी के उस पार गन्ने के सुंदर और मीठे खेत थे। सियार का गन्ना खाने का बहुत मन हुआ, लेकिन वह नदी तैरकर पार नहीं कर सकता था।

सियार ने ऊँट को एक तरकीब बताई: “मित्र ऊँट, मैं तुम्हारी पीठ पर बैठ जाता हूँ और हम नदी पार करके गन्ना खाते हैं!” ऊँट मान गया। सियार उसकी पीठ पर बैठ गया और दोनों नदी पार करके खेत में पहुँच गए। दोनों पेट भरकर गन्ना खाने लगे।

सियार का पेट छोटा था, इसलिए वह जल्दी भर गया। वह ज़ोर-ज़ोर से हुआँ-हुआँ करके गाने लगा। ऊँट ने धीरे से कहा, “चकू, चुप हो जाओ, किसान जाग जाएगा!” लेकिन सियार बोला, “खाना खाने के बाद गाना गाना मेरी आदत है।” आवाज़ सुनकर किसान लाठी लेकर आ गया। सियार छोटा था, इसलिए वह फ़सल के पीछे छिप गया, लेकिन ऊँट बड़ा होने के कारण पकड़ा गया और किसान ने उसकी जमकर पिटाई कर दी।

वापस लौटते समय सियार फिर से ऊँट की पीठ पर बैठ गया। नदी के बीचों-बीच पहुँचकर ऊँट ने पानी में डुबकी लगाना शुरू कर दिया। सियार घबराकर बोला, “अरे ऊँट भाई, यह क्या कर रहे हो? मैं डूब जाऊँगा!” ऊँट ने हँसते हुए कहा, “खेत में पिटाई खाने के बाद पानी में नहाना मेरी आदत है।” सियार पानी में बह गया और उसे अपने स्वार्थ का सबक़ मिल गया।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

धोखेबाज़ और स्वार्थी दोस्तों की संगति करने से हमारा ही नुक़सान होता है, और अंत में जैसे को तैसा ही मिलता है।