शेरू नाम का एक आवारा कुत्ता था। एक दिन बाज़ार के पास उसे एक बड़ा और मसालेदार हड्डी का टुकड़ा मिला। वह बहुत खुश हो गया। उसने सोचा कि वह किसी शांत जगह जाकर अकेले ही इस हड्डी का मज़ा लेगा।
हड्डी को मुँह में दबाकर वह नदी पर बने एक छोटे से लकड़ी के पुल से गुज़र रहा था। पुल के बीच में पहुँचकर उसने नीचे नदी के शांत पानी में देखा।
स्थिर पानी में उसे अपनी ही परछाईं (प्रतिबिंब) दिखाई दी। लेकिन उस मूर्ख कुत्ते ने सोचा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता है, जो मुँह में हड्डी दबाए खड़ा है! शेरू के मन में लालच आ गया: “अगर मैं उस कुत्ते की हड्डी भी छीन लूँ, तो मेरे पास दो हड्डियाँ हो जाएँगी!”
दूसरे कुत्ते को डराने के लिए शेरू ने जैसे ही मुँह खोलकर भौंकना शुरू किया “भौं भौं…”, वैसे ही उसके अपने मुँह से हड्डी छूटकर नदी के गहरे पानी में जा गिरी और पानी के बहाव में बह गई। शेरू लालच के कारण हाथ में आई हड्डी भी गँवा बैठा और भूखा ही रह गया।