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बिरबल और सच्चा मालिक (Birbal and the True Owner)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: बीरबल, पड़ोसी रामदास, पड़ोसी श्यामलाल

बिरबल और सच्चा मालिक (Birbal and the True Owner)
અક્ષરનું માપ:

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन दो पड़ोसी, रामदास और श्यामलाल आए। दोनों के बीच एक सुंदर, फलों से लदे आम के पेड़ के मालिकाना हक को लेकर बड़ा झगड़ा था। रामदास का कहना था कि यह पेड़ उसके पिता ने लगाया था, जबकि श्यामलाल दावा कर रहा था कि यह उसके खेत की सीमा में आता है, इसलिए यह उसका है।

बादशाह ने यह मामला चतुर मंत्री बीरबल को सौंपा। बीरबल ने दोनों पक्षों को शांति से सुना, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं था। बीरबल ने न्याय करने के लिए एक नई तरकीब निकाली। उसने दरबार में घोषणा की: “यह मामला स्पष्ट नहीं है, इसलिए हम कल इस आम के पेड़ को काट डालेंगे और उसके लकड़ी के दो बराबर हिस्से दोनों पड़ोसियों में बाँट देंगे।”

यह सुनकर श्यामलाल ने कहा, “जैसा आपका आदेश, मंत्री जी। आधी लकड़ी भी चलेगी।” लेकिन रामदास रोने लगा और बोला, “बीरबल जी, मेहरबानी करके इस सुंदर हरे-भरे पेड़ को मत काटिए। मैंने इसे सालों से बच्चे की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया है। भले ही इसे श्यामलाल रख ले, लेकिन इसे काटिए मत!” बीरबल तुरंत समझ गया कि असली मालिक कौन है। उसने सच्चा फैसला सुनाते हुए असली मालिक रामदास को पेड़ सौंप दिया और श्यामलाल पर जुर्माना (दंड) लगाया।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

जो वस्तु सच में आपकी होती है, उसके प्रति आपका प्रेम और ममता कभी उसका नुकसान बर्दाश्त नहीं कर सकती; जबकि स्वार्थी व्यक्ति केवल अपना फायदा ही देखता है।