जंगल का एक शक्तिशाली शेर बूढ़ा और कमज़ोर हो गया था। उसने वनराज के नाते सियार को अपना मंत्री बनाया और गधे को सहायक के रूप में रखा। शेर ने कहा, “तुम शिकार ढूँढकर लाओ, मैं उसे मारूँगा और हम सब बाँटकर खाएँगे।”
मंत्री सियार ने अपनी बुद्धि चलाई और गधे को शेर की गुफ़ा के पास भेज दिया। शेर ने झपट्टा मारकर गधे का शिकार कर लिया। लंबी भाग-दौड़ के कारण शेर थक गया था, इसलिए वह नदी पर पानी पीने चला गया और सियार को शिकार का ध्यान रखने के लिए कहा।
जैसे ही शेर गया, भूखे सियार ने चतुरता दिखाते हुए गधे का भेजा (दिमाग़) और कान खा लिए। शेर वापस आया और गधे की ऐसी हालत देखकर गुस्से से गरजा, “तुमने इसके कान और दिमाग़ क्यों निकाल लिए?” सियार हँसते हुए नम्रता से बोला, “महाराज! गधे के पास कान या दिमाग़ होते ही नहीं हैं। अगर इसके पास दिमाग़ होता, तो क्या यह जान-बूझकर आपकी गुफ़ा में आपके पास आता?” शेर सियार की बातों में आ गया और शांत हो गया। इस तरह सियार ने अपनी बुद्धि से अपने प्राण भी बचा लिए और स्वादिष्ट भोजन भी प्राप्त कर लिया।