एक विशालकाय और अहंकारी हाथी गज़राज सूँड हिलाता हुआ पूरे जंगल में घूमता था और छोटे जीवों का मज़ाक़ उड़ाता था। एक दिन वह बरगद के पेड़ के नीचे खड़ा था, तभी चीकू नाम की एक नटखट गिलहरी ने उस पर एक छोटा सा फल फेंक दिया। हाथी ने क्रोधित होकर चीकू को उसकी कमज़ोरी याद दिलाई और उसका मज़ाक़ उड़ाया।
चीकू ने नम्रतापूर्वक कहा कि आकार में छोटा होना कोई कमी नहीं है, मुसीबत के समय छोटा जीव भी मददगार साबित हो सकता है। हाथी हँसकर चला गया। दो हफ़्ते बाद जंगल में शिकारियों ने रस्सियों का जाल बिछाया और गज़राज उसमें फँस गया। अपने अपार बल के बावजूद हाथी उस जाल को काट नहीं पाया और दर्द से चीखने-चिल्लाने लगा।
गिलहरी चीकू तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ी। अपने छोटे लेकिन बेहद नुकीले दाँतों से उसने कुछ ही मिनटों में पूरे जाल की मोटी रस्सियों को काट दिया और गज़राज की जान बचा ली। गज़राज की आँखों में आँसू आ गए और उसने चीकू से माफ़ी माँगकर नम्रता स्वीकार कर ली।