एक सुंदर जंगल में चीकू नाम का एक छोटा और डरपोक खरगोश रहता था। वह हमेशा छोटी-छोटी बातों से डर जाता था। एक दिन वह एक बड़े नारियल के पेड़ के नीचे आराम से सो रहा था।
अचानक हवा चली और पेड़ से एक बड़ा नारियल नीचे गिरा – ‘धड़ाम!’ यह तेज़ आवाज़ सुनकर चीकू खरगोश हड़बड़ाकर जाग गया। उसने पीछे मुड़कर देखा भी नहीं और मन ही मन सोच लिया कि, “अरे बाप रे! लगता है बड़ा भूकंप आ गया है! आसमान गिर रहा है!”
वह घबराकर भागने लगा और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, “भागो! भागो! आसमान गिर रहा है, धरती फट रही है!” रास्ते में उसे एक हिरण मिला। हिरण ने पूछा, “चीकू भाई, इतने घबराकर क्यों दौड़ रहे हो?” खरगोश ने कहा, “हिरण भाई, भागो! आसमान गिर रहा है!” हिरण भी घबरा गया और खरगोश के पीछे दौड़ने लगा।
धीरे-धीरे यह बात पूरे जंगल में फैल गई। बंदर, हाथी, भालू और सभी जानवर जान बचाने के लिए दौड़ने लगे। पूरा जंगल भयभीत हो गया।
जंगल के राजा शेर ने यह अफ़रा-तफ़री देखी। उसने सभी जानवरों को रोका और पूछा, “तुम सब इस तरह इधर-उधर क्यों भाग रहे हो?” हाथी ने कहा, “महाराज, आसमान गिर रहा है!” शेर ने पूछा, “तुमसे किसने कहा?” हाथी ने कहा, “मुझसे भालू ने कहा।” भालू ने कहा, “मुझसे बंदर ने कहा।” इस तरह बात घूम-फिरकर खरगोश पर आ गई।
शेर ने चीकू खरगोश से पूछा, “चीकू, तुम्हें कहाँ दिखा कि आसमान गिर रहा है?” खरगोश ने काँपती आवाज़ में कहा, “महाराज, मैं जहाँ सो रहा था वहाँ एक तेज़ आवाज़ आई और आसमान गिरने लगा।” शेर सभी जानवरों को साथ लेकर उस जगह पर गया।
वहाँ जाकर देखा तो ज़मीन पर एक बड़ा नारियल पड़ा हुआ था। शेर ने हँसकर कहा, “देखो, यह नारियल गिरने की आवाज़ थी, कोई आसमान नहीं गिरा है!” सभी जानवर खरगोश की मूर्खता पर हँसने लगे और अपने-अपने घर लौट गए।