एक बड़ी नदी के किनारे एक बड़ा और सुंदर आम का पेड़ था। इस पेड़ पर एक प्यारा और चालाक बंदर रहता था। पेड़ पर बहुत मीठे और रसीले आम लगते थे। बंदर पेट भरकर आम खाता था और खुशी-खुशी रहता था।
उसी नदी में एक बड़ा मगरमच्छ अपनी पत्नी के साथ रहता था। एक दिन, मगरमच्छ किनारे पर आया। बंदर ने मगरमच्छ को देखा और पूछा, “भाई, क्या तुम्हें भूख लगी है? ये लो, ये मीठे आम खाओ।” बंदर ने मीठे आम पेड़ से नीचे फेंक दिए। मगरमच्छ को आम बहुत स्वादिष्ट लगे। इस तरह, दोनों रोज़ मिलने लगे और दोस्त बन गए।
एक दिन, मगरमच्छ अपनी पत्नी के लिए कुछ आम घर ले गया। उसकी पत्नी ने आम खाए और कहा, “वाह! जो बंदर रोज़ इतने मीठे आम खाता है, उसका दिल कितना मीठा होगा! मैं उस बंदर का लिवर खाना चाहती हूँ। तुम इसे किसी भी तरह यहाँ ले आओ।” पहले तो मगरमच्छ अपने दोस्त को धोखा देने को तैयार नहीं था, लेकिन उसे अपनी पत्नी की ज़िद के आगे झुकना पड़ा।