एक जंगल में एक कौआ रहता था। गर्मी के दिनों में बहुत गर्मी थी और जंगल के तालाब सूख गए थे। कौए को प्यास लगी लेकिन उसे कहीं पानी नहीं मिला। वह पानी की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा।
उड़ते-उड़ते उसे एक घर के पास मिट्टी का एक बड़ा सा घड़ा दिखा। कौआ खुश होकर घड़े पर बैठ गया, लेकिन जब उसने देखा कि घड़े के नीचे बहुत कम पानी है। कौए की चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी।
कौए ने सोचा और हिम्मत नहीं हारी। उसने घड़े के चारों ओर छोटे-छोटे कंकड़ देखे। उसने एक कंकड़ मुँह में लिया और उसे घड़े में फेंकने लगा। जैसे-जैसे कंकड़ घड़े में गिरते गए, पानी का लेवल बढ़ने लगा।
कुछ ही मिनटों में पानी घड़े के किनारे तक पहुँच गया। चालाक कौए ने जी भरकर पानी पिया और खुशी से काँव-काँव करते हुए उड़ गया।