एक सपेरे ने एक काले नाग को बाँस की टोकरी (सूप) में बंद करके मज़बूत रस्सी से बाँध दिया। साँप भयंकर भूखा था और बाहर निकलने के लिए तड़प रहा था।
उसी रात भोजन की तलाश में एक छोटा चूहा उस टोकरी के पास आ पहुँचा। टोकरी के अंदर से साँप ने मीठी आवाज़ में कहा, “हे मित्र चूहे! अगर तुम इस बाँस की टोकरी में एक छोटा सा छेद कर दो, तो मैं तुम्हें अंदर रखे रोटी के टुकड़े दे दूँगा और हम हमेशा के लिए मित्र बन जाएँगे।”
चूहे ने साँप की बात पर विश्वास कर लिया। उसने अपने नुकीले दाँतों से टोकरी में एक बढ़िया छेद बना दिया। छेद बड़ा होते ही साँप तेज़ी से बाहर आ गया।
बाहर आते ही भूखे साँप ने चूहे पर हमला कर दिया और उसे निगल गया। चूहे को अपनी मूर्खता का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। स्वार्थी और जन्मजात शत्रु पर विश्वास करना भारी पड़ गया।