एक देश में मिडास नाम का एक अत्यंत धनी राजा रहता था। राजा मिडास के पास अपार सोना था, फिर भी वह सोने का बहुत लालची था। वह दिन-रात और अधिक सोना पाने की इच्छा रखता था।
एक दिन एक देवदूत ने राजा मिडास को वरदान माँगने को कहा। मिडास ने तुरंत कहा, ‘मैं जिस भी वस्तु को स्पर्श करूँ, वह सोने की बन जाए!’ देवदूत ने उसे वरदान दे दिया।
मिडास बहुत खुश हुआ। उसने महल के दरवाज़े, कुर्सियाँ और बगीचे के गुलाब के फूलों को छुआ, और सब कुछ सोने का बन गया। लेकिन जब वह खाना खाने बैठा तो उसने जैसे ही रोटी और पानी को छुआ, वह भी सोने का बन गया! वह कुछ भी खा या पी नहीं सका। तभी उसकी प्यारी बेटी मैरीगोल्ड दौड़ती हुई आई। मिडास ने उसे गले लगाया तो बेटी भी सोने की मूर्ति बन गई! मिडास रो पड़ा और अपने लालच पर पछताते हुए देवदूत से वरदान वापस लेने की प्रार्थना की। देवदूत ने उसे मुक्त किया और मिडास समझ गया कि प्रेम और संतोष ही असली धन है।