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कृतज्ञ पशु और कृतघ्न सुनार (The Grateful Animals and the Ungrateful Goldsmith)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: ब्राह्मण, बाघ, बंदर, साँप, सुनार, राजा

कृतज्ञ पशु और कृतघ्न सुनार (The Grateful Animals and the Ungrateful Goldsmith)
અક્ષરનું માપ:

एक ग़रीब ब्राह्मण था। एक बार वह जंगल से गुज़र रहा था, तब उसने एक कुएँ में एक बाघ, एक बंदर, एक साँप और एक इंसान को फँसे हुए देखा। उन्होंने ब्राह्मण से मदद माँगी।

ब्राह्मण को पहले तो जानवरों को बाहर निकालने में डर लगा, लेकिन दया आने पर उसने बाघ, बंदर और साँप को बाहर निकाल दिया। उन तीनों जीवों ने ब्राह्मण का आभार व्यक्त किया और कहा, “हम आपके इस उपकार का बदला ज़रूर चुकाएँगे।” आख़िर में ब्राह्मण ने उस इंसान को भी बाहर निकाला, जो पेशे से एक सुनार था। सुनार ने कहा, “अगर आपको कभी ज़रूरत पड़े, तो नगर में मेरी दुकान पर आइएगा।”

कुछ समय बाद ब्राह्मण संकट में पड़ गया। वह बंदर के पास गया, तो बंदर ने उसे मीठे फल दिए। फिर वह बाघ के पास गया, तो बाघ ने उसे कीमती सोने के आभूषण दिए। ब्राह्मण आभूषण बेचने के लिए नगर में रहने वाले उसी सुनार के पास गया।

लेकिन लालची सुनार ने मदद करने के बजाय ब्राह्मण को गिरफ़्तार करवा दिया, क्योंकि वे आभूषण राजकुमार के थे जो गुम हो गए थे। जेल में ब्राह्मण ने साँप को याद किया। साँप ने आकर रानी को डंस लिया और ऐसी तरकीब बनाई कि केवल ब्राह्मण के छूने से ही ज़हर उतरेगा। राजा ने ब्राह्मण को रिहा कर दिया और धोखेबाज़ सुनार को जेल में डाल दिया।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

जानवर कभी उपकार नहीं भूलते, लेकिन इंसान अपने स्वार्थ के लिए धोखा दे सकता है।