एक जंगल के पास एक नगर था। एक दिन नगर से एक चोर सोने का घंटा चुराकर जंगल की तरफ भागा। जंगल में एक बाघ ने उस चोर पर हमला करके उसे मार डाला। वह घंटा जंगल में ही पड़ा रह गया।
कुछ दिनों बाद बंदरों के एक झुंड को वह सोने का घंटा मिला। बंदर घंटा बजाकर मज़ा लेने लगे। जब भी वे घंटा बजाते, जंगल में घंटे की तेज़ आवाज़ गूँजती।
नगर के लोगों ने सोचा कि जंगल में कोई भयानक राक्षस आ गया है जो घंटा बजाता है और लोगों को मार डालता है। सभी लोग डरने लगे। लेकिन एक बुद्धिमान स्त्री ने सोचा कि राक्षस कभी भी नियमित समय पर घंटा नहीं बजाएगा। वह सच्चाई का पता लगाने अकेली ही जंगल में गई।
वहाँ उसने देखा कि बंदर पेड़ पर बैठकर खेल-खेल में घंटा बजा रहे थे। वह स्त्री नगर वापस आई और राजा से कहा, “मैं उस राक्षस को भगा सकती हूँ, लेकिन मुझे कुछ फल दीजिए।”
फल लेकर वह जंगल गई और उन्हें पेड़ के नीचे फेंक दिया। बंदर फल खाने के लालच में घंटा नीचे फेंककर फल खाने लगे। वह स्त्री घंटा उठाकर नगर वापस आ गई। राजा और सभी नगरवासी बहुत खुश हुए।