एक गाँव में रामजी नाम का एक वृद्ध किसान अपने चार बेटों के साथ रहता था। चारों बेटे बहुत मेहनती थे, लेकिन वे आपस में छोटी-छोटी बातों पर हमेशा झगड़ते रहते थे। पिता उन्हें बार-बार समझाते थे, लेकिन उनकी कोई बात नहीं मानते थे।
एक दिन वृद्ध पिता बहुत बीमार पड़ गए। उन्होंने अपने चारों बेटों को अपने पास बुलाया। फिर बड़े बेटे से कहा, “जंगल से सूखी लकड़ियाँ लाकर उनका एक मज़बूत गट्ठर बनाओ।” बेटों ने वैसा ही किया और लकड़ियों का एक गट्ठर बनाकर उनके सामने रख दिया।
पिता ने बड़े बेटे से कहा, “लो, अब इस बँधे हुए पूरे गट्ठर को तोड़कर दिखाओ।” बड़े बेटे ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन वह गट्ठर नहीं तोड़ सका। फिर पिता ने दूसरे, तीसरे और चौथे बेटे को भी बारी-बारी से वही प्रयास करने के लिए कहा, लेकिन कोई भी सफल नहीं हुआ।
इसके बाद पिता ने गट्ठर की रस्सी खोल दी और चारों बेटों को एक-एक लकड़ी देते हुए कहा, “अब इन लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ो।” चारों बेटों ने पल भर में अपनी-अपनी लकड़ी तोड़ दी।
तब पिता ने प्रेम से समझाया, “देखा बेटों! जब तक ये लकड़ियाँ एक साथ बँधी थीं, तब तक कोई इन्हें नहीं तोड़ सका। लेकिन जैसे ही ये अलग हुईं, तुरंत टूट गईं। ठीक इसी तरह यदि तुम सब भी हमेशा मिल-जुलकर और एकजुट होकर रहोगे, तो कोई भी शत्रु तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा।”
पिता की बात सुनकर चारों बेटों को एकता का महत्व समझ में आ गया।