एक भूखा सियार भोजन की तलाश में जंगल में भटक रहा था। भटकते-भटकते वह एक पुराने युद्ध के मैदान के पास पहुँचा। वहाँ हवा चलने के कारण पेड़ की डालियाँ एक बड़े ढोल से टकरा रही थीं, जिससे ज़ोरदार आवाज़ पैदा हो रही थी। सियार पहले तो यह आवाज़ सुनकर डर गया।
लेकिन उसने सोचा कि इतनी बड़ी आवाज़ के पीछे ज़रूर कोई बड़ा और स्वादिष्ट जानवर होगा। वह हिम्मत करके ढोल के पास गया। उसने देखा कि ढोल चमड़े से मढ़ा हुआ था। सियार ने सोचा कि इसके अंदर बहुत ही स्वादिष्ट मांस भरा होगा। लालच में आकर उसने अपने नुकीले दाँतों से ढोल का चमड़ा फाड़ दिया।
जब ढोल अंदर से खुला, तो वह बिल्कुल खाली था! उसमें कोई मांस नहीं था। सियार बहुत निराश हुआ और उसे अपनी भूल का एहसास हुआ।