एक सुंदर गाँव में गोपाल नाम का एक छोटा चरवाहा रहता था। गोपाल रोज़ गाँव के बाहर भेड़-बकरियाँ चराने जाता था। लेकिन गोपाल को शरारत और मज़ाक करने की बुरी आदत थी।
एक दिन गोपाल को मज़ाक सूझा। वह एक ऊँची पहाड़ी पर चढ़ गया और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, ‘भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ, भेड़िया मेरी भेड़ों को मार रहा है!’ गाँव के लोग लाठियाँ लेकर दौड़ते हुए आए। लेकिन वहाँ आकर देखा तो कोई भेड़िया नहीं था, गोपाल हँस रहा था। गाँव वाले गुस्सा होकर लौट गए।
कुछ दिनों बाद गोपाल ने फिर वही मज़ाक दोहराया और गाँव वालों को परेशान किया। गाँव वालों ने तय किया कि अब गोपाल की बात पर कभी भरोसा नहीं करेंगे।
एक दिन सचमुच जंगल से एक भयानक भेड़िया आ गया और भेड़ों पर हमला कर दिया। गोपाल घबरा गया और ज़ोर से चिल्लाने लगा, ‘बचाओ! सचमुच भेड़िया आया है!’ लेकिन गाँव वालों ने सोचा कि गोपाल फिर मज़ाक कर रहा है, इसलिए कोई मदद के लिए नहीं आया। भेड़िया उसकी भेड़ों को मार गया। गोपाल को अपने झूठ बोलने का बहुत पछतावा हुआ।