आकाश के ऊँचे बादलों में इंद्रधनुष के सात सुंदर रंग — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी खुशी-खुशी रहते थे। जब भी ये रंग आसमान में फैलते, तो धरती पर बच्चे खुशी से झूम उठते थे।
लेकिन एक दिन इन सातों रंगों के बीच घमंड का विवाद छिड़ गया। हर रंग खुद को सबसे सुंदर, महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ साबित करना चाहता था।
लाल रंग ने गर्व से कहा, “मैं संसार का सबसे महान रंग हूँ! मैं प्रेम, साहस और जीवन की लालिमा का प्रतीक हूँ। मेरे बिना दुनिया बेरंग है!”
नारंगी और पीले रंग ने हँसकर कहा, “अरे लाल! सूर्य की सुनहरी किरणों और रसीले फलों में हमारा ही रंग चमकता है। हम खुशी और उजाला फैलाते हैं, इसलिए हम श्रेष्ठ हैं!”
हरे रंग ने कहा, “तुम सब चुप रहो! पूरी धरती पर पेड़-पौधों, जंगलों और खेतों में मेरा हरा रंग छाया हुआ है। मैं जीवन का प्रतीक हूँ!”
नीले और जामुनी रंगों ने भी अपनी तारीफें कीं। बात इतनी बढ़ गई कि सातों रंग एक-दूसरे से अलग होकर रूठ गए और आसमान में काला अंधेरा छा गया।
तभी वर्षा के बुजुर्ग और बुद्धिमान ‘पवनदेव’ ज़ोर से गरजे! पवनदेव ने कहा, “ओ मूर्ख रंगो! तुम आपस में क्यों लड़ रहे हो? क्या तुम नहीं जानते कि केवल लाल या केवल नीले रंग से कभी सुंदर इंद्रधनुष नहीं बनता? जब तुम सातों रंग मिलकर एक-दूसरे का साथ देते हो, तभी अद्भुत इंद्रधनुष प्रकट होता है!”
सातों रंगों को अपनी भूल का अहसास हुआ। उन्होंने अपना घमंड त्याग दिया और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आसमान में एक शानदार धनुष बनाया।
जैसे ही सप्तरंगी इंद्रधनुष खिला, धरती पर बच्चे खुशी से नाचने लगे!
यह कहानी हमें सिखाती है कि ‘विविधता में ही असली एकता है’। जब हम मिलकर रहते हैं, तभी दुनिया सुंदर बनती है।
**विविधता में एकता और अहंकार का त्याग:**
इंद्रधनुष के सात रंगों की यह सुंदर कहानी बच्चों के मन में संगठन और सहयोग के गुणों का सिंचन करती है। यह कहानी दिखाती है कि हमारा घमंड हमें एक-दूसरे से दूर कर देता है और जीवन में अंधेरा भर देता है। लेकिन जब हम भेदभाव भूलकर सबके साथ मिलकर काम करते हैं, तो इंद्रधनुष जैसा सुंदर परिणाम मिलता है। बच्चों को स्कूल और समाज में सभी दोस्तों के साथ प्रेम से रहने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
**कहानी की मुख्य सीख और जीवन मूल्य:**
1. कभी भी सत्य और ईमानदारी का मार्ग न छोड़ें।
2. विपत्ति के समय धैर्य, शांति और विवेक से काम लें।
3. दूसरों के दुख में सहानुभूति दिखाएं और यथासंभव मदद करें।
4. समय का आदर करें और आलस त्यागकर कठिन परिश्रम करें।
5. संकट के समय एकता और आपसी सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
यह शिक्षाप्रद कहानी बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास में अद्भुत संस्कारों का सिंचन करती है। जब मन में सत्य, ईमानदारी, धैर्य और साहस जैसे सद्गुण होते हैं, तो जीवन की हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने का सुंदर मार्ग अपने आप मिल जाता है। सज्जनता, परोपकार और प्रभु-भक्ति ही हमारी सच्ची संपत्ति है। हर बच्चे को ऐसी सुंदर कहानियाँ पढ़कर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाना चाहिए।