एक जंगल में चंडरव नाम का एक सियार रहता था। एक बार भोजन की तलाश में वह पास के शहर में घुस गया। वहाँ के आवारा कुत्ते उसके पीछे पड़ गए। बचने के लिए सियार दौड़कर एक धोबी के घर में रखे नील के ड्रम (पीपे) में कूद पड़ा।
जब वह बाहर आया, तो उसका पूरा रंग गहरा नीला हो चुका था। जब वह जंगल में वापस लौटा, तो उसके नीले रंग को देखकर शेर, बाघ, हाथी और सभी जानवर डर गए। सियार ने इस अवसर का लाभ उठाया।
उसने गंभीर आवाज़ में कहा, “मुझे ब्रह्मा जी ने स्वयं तुम सबका राजा बनाकर भेजा है!” सभी जानवरों ने उसे राजा मान लिया और रोज़ उसकी सेवा करने लगे। नीले सियार ने दूसरे सियारों को जंगल से खदेड़ दिया।
एक पूर्णिमा की रात सियारों का पुराना झुंड ज़ोर-ज़ोर से हुआँ-हुआँ (लाड़ी) करने लगा। नीला सियार अपने स्वभाव पर क़ाबू न रख सका और वह भी उनके साथ सुर मिलाकर ज़ोर-ज़ोर से हुआँ-हुआँ करने लगा। शेर और बाघ समझ गए कि यह कोई राजा नहीं बल्कि साधारण सियार ही है। सच सामने आते ही सभी जानवरों ने मिलकर उसे सजा दी।