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ईमानदार किसान और सोने के सिक्के (The Honest Farmer and the Pot of Gold)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: किसान माधवजी, पड़ोसी सोमजी

ईमानदार किसान और सोने के सिक्के (The Honest Farmer and the Pot of Gold)
અક્ષરનું માપ:

एक गाँव में माधवजी नाम का एक मेहनती और ईमानदार किसान रहता था। उसका खेत बहुत छोटा था। एक दिन उसने अपने पड़ोसी सोमजी से ज़मीन का एक टुकड़ा खरीदा। माधवजी ने उस नई ज़मीन को जोतना शुरू किया।

अभी उसने आधा खेत ही जोता था कि हल लोहे की एक बड़ी चीज़ से टकराया। माधवजी ने सावधानीपूर्वक मिट्टी खोदकर देखा तो अंदर से तांबे का एक घड़ा (मटका) निकला, जो सोने के सिक्कों से लबालब भरा हुआ था! इतना सारा सोना देखकर भी माधवजी के मन में लालच नहीं आया। उसने सोचा, “यह ज़मीन मैंने अभी-अभी सोमजी से खरीदी है, इसलिए यह सोना उसके पूर्वजों का होगा। मुझे यह उसे वापस लौटा देना चाहिए।”

माधवजी घड़ा लेकर सोमजी के पास गया और बोला, “सोमजी भाई, आपकी ज़मीन से मुझे ये सोने के सिक्के मिले हैं। यह आपका है, कृपया इसे रख लीजिए।” सोमजी भी उतना ही ईमानदार था। उसने कहा, “माधवजी भाई, मैंने आपको ज़मीन बेच दी है, इसलिए अब उसके अंदर का सब कुछ आपका ही है। मैं इसे नहीं रख सकता।” दोनों मित्र एक-दूसरे को सोना देने का प्रयास कर रहे थे। अंत में दोनों ने तय किया कि वे इस सोने का उपयोग गाँव के ग़रीब बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल बनाने में करेंगे।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

सच्ची अमीरी जेब में नहीं, बल्कि दिल की ईमानदारी में होती है। परोपकार ही श्रेष्ठ धर्म है।