एक गधा रात में खीरे के खेत में चएक गाँव में उद्धत नाम का एक गधा रहता था। दिन के समय वह मालिक का भारी बोझ उठाता और रात में आज़ाद होकर जंगल के पास के खेतों में घूमता। उसकी दोस्ती एक चालाक सियार से हो गई थी। दोनों रात में साथ मिलकर खेतों में ककड़ी और सब्जियाँ चरने जाते थे।
एक पूर्णिमा की रात खेत में रसीली ककड़ियाँ खाने के बाद गधे का मन प्रसन्न हो गया। गधे ने सियार से कहा, “मित्र! रात कितनी सुंदर है, मेरा मधुर गीत गाने का मन कर रहा है!” सियार ने घबराकर कहा, “अरे मित्र! यह गीत गाने का समय नहीं है। हम चोरी करने आए हैं और तुम्हारी आवाज़ कर्कश है। किसान जाग जाएगा!”
लेकिन गधे ने घमंड में कहा, “तुम्हें संगीत का कोई अनुभव नहीं है। मैं तो ज़रूर गाऊँगा!” सियार ने समझदारी दिखाई और खेत के बाहर झाड़ियों में छिप गया। गधे ने मुँह ऊपर उठाकर ज़ोर-ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया।
आवाज़ सुनते ही किसान लाठी लेकर दौड़ा आया और उसने गधे की जमकर पिटाई कर दी। गधा लंगड़ाते-लंगड़ाते बाहर आया तो सियार ने हँसकर कहा, “संगीत का इनाम अच्छा मिला न मित्र!” गधे को अपनी मूर्खता का एहसास हो गया।