एक घने जंगल में बरगद का एक बड़ा पेड़ था। एक दिन अचानक आकाश में काले-कलूटे बादल घिर आए और ज़ोरदार तूफ़ान के साथ बारिश शुरू हो गई। तोता और कबूतर नाम के दो पक्षी अपने पंख भीग जाने के कारण आश्रय (सहारा) ढूँढ़ने लगे।
वे बरगद के पेड़ के पास गए और विनती की, “हे महान वृक्ष! हमें इस तूफ़ान में अपने घने पत्तों के नीचे आश्रय दीजिए।” दयालु बरगद के पेड़ ने दोनों पक्षियों को अपने बड़े कोटर (खोखल) में सुरक्षित बैठा लिया।
तूफ़ान थमने के बाद जब दोनों पक्षी बाहर आए तो उन्होंने पेड़ का धन्यवाद किया। तोते ने कहा, “आपने हमें गर्माहट और आश्रय दिया, वरना हम ठंड में मर गए होते।”
पेड़ ने मुस्कुराकर कहा, “मुसीबत के समय दूसरों को सहारा देना ही हमारा धर्म है।” पक्षियों ने उस पेड़ पर अपने घोंसले बनाकर हमेशा के लिए उसकी रक्षा करने का संकल्प लिया।