एक नगर में सुमंतलाल नाम के एक प्रतिष्ठित जासूस रहते थे। वे अपराधियों को पकड़ने के लिए अपनी कुशल तर्कशक्ति और मनोविज्ञान का उपयोग करते थे। एक रात गाँव के एक धनी व्यापारी के घर से कीमती सोने का हार चोरी हो गया।
व्यापारी ने सुमंतलाल को बुलाया। घर में चार नौकर थे, और घर के बाहर से कोई नहीं आया था। जासूस समझ गया कि चोर नौकरों में से ही कोई एक है। उसने चारों नौकरों को पंक्ति में खड़ा किया और प्रत्येक को एक समान लंबाई की एक-एक छड़ी (लकड़ी) दी।
सुमंतलाल ने गंभीरता से कहा, “ये जादुई छड़ियाँ हैं। जिसने चोरी की होगी, उसकी छड़ी कल सुबह दो इंच लंबी हो जाएगी!” चारों नौकर अपनी-अपनी छड़ी लेकर सोने चले गए। जो असली चोर था, वह घबरा गया। उसने सोचा कि अगर मेरी छड़ी दो इंच लंबी हो गई तो मैं पकड़ा जाऊँगा। इसलिए उसने रात में ही अपनी छड़ी को नीचे से दो इंच काट दिया। अगले दिन सुबह जब जासूस ने छड़ियों को नापा, तब एक नौकर की छड़ी दो इंच छोटी निकली! चोर तुरंत पकड़ा गया और व्यापारी का हार वापस मिल गया।