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चतुर बिरबल और खिचड़ी (Birbal’s Khichdi)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: अकबर, बिरबल, गरीब ब्राह्मण

चतुर बिरबल और खिचड़ी (Birbal’s Khichdi)
અક્ષરનું માપ:

सर्दियों का मौसम था। एक दिन बादशाह अकबर नगर के तालाब के पास खड़े होकर घोषणा करने लगे, “जो कोई इस कड़ाके की ठंड में पूरी रात इस तालाब के पानी में खड़ा रहेगा, उसे मैं सौ सोने की मोहरों का इनाम दूँगा।”

एक गरीब ब्राह्मण ने अपने परिवार का पेट भरने के लिए यह चुनौती स्वीकार कर ली। वह पूरी रात ठंड से काँपते हुए तालाब के पानी में खड़ा रहा। सुबह वह अपना इनाम लेने दरबार पहुँचा। अकबर ने उससे पूछा, “तुमने इतनी ठंड में पूरी रात कैसे बिताई?”

ब्राह्मण ने सच-सच उत्तर दिया, “महाराज, महल की एक खिड़की पर दूर एक छोटा-सा दीपक जल रहा था। मैंने पूरी रात अपना मन उसी दीपक की लौ पर केंद्रित रखा, इसलिए मैं यह कठिन परीक्षा पूरी कर सका।”

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

अपनी बुद्धि का सही उपयोग करके न्याय दिलाना और गरीबों की सहायता करना ही सच्ची चतुराई है।