एक गाँव में मोतीलाल नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत मेहनत करता था, लेकिन फिर भी बड़ी मुश्किल से अपने परिवार का गुज़ारा कर पाता था। एक दिन वह बाज़ार से एक अनोखी मुर्गी खरीदकर लाया।
अगली सुबह मोतीलाल ने देखा कि मुर्गी के घोंसले में एक चमकदार पीला अंडा रखा हुआ है। जब उसने उसे हाथ में उठाया, तो वह हैरान रह गया, क्योंकि वह असली सोने का अंडा था। किसान ने उसे बाज़ार में बेच दिया और बदले में उसे बहुत सारे पैसे मिले।
अब हर सुबह वह मुर्गी एक सोने का अंडा देने लगी। धीरे-धीरे मोतीलाल अमीर बनने लगा। उसने एक बड़ा नया घर खरीद लिया और महंगे कपड़े पहनने लगा। लेकिन जैसे-जैसे उसकी दौलत बढ़ी, वैसे-वैसे उसका लालच भी बढ़ता गया।
एक रात मोतीलाल ने सोचा, “अगर यह मुर्गी हर दिन एक सोने का अंडा देती है, तो इसके पेट में ज़रूर सोने का बहुत बड़ा ख़ज़ाना होगा। अगर मैं इसका पेट काट दूँ, तो मुझे सारा सोना एक साथ मिल जाएगा और मुझे रोज़ इंतज़ार भी नहीं करना पड़ेगा।”
लालच में अंधा होकर मोतीलाल ने चाकू से मुर्गी को मार डाला और उसका पेट चीर दिया। लेकिन जब उसने अंदर देखा, तो वह दुख और पछतावे से भर गया। मुर्गी के पेट में कुछ भी नहीं था। वह बिल्कुल एक साधारण मुर्गी की तरह ही थी। कोई सोना नहीं था। अपनी लालच के कारण मोतीलाल ने हमेशा के लिए सोने के अंडे देने वाली अनमोल मुर्गी खो दी।