एक घने जंगल में सोनू नाम का एक बहुत ही सुंदर हिरण रहता था। उसके सिर पर सुंदर, घुमावदार और लंबे सींग थे। एक दिन सोनू नदी का साफ़ पानी पीने गया।
पानी की सतह में उसने अपना प्रतिबिंब देखा। वह अपने आकर्षक सींगों को देखकर गर्व से फूल उठा: “अरे वाह! मेरे सींग कितने भव्य हैं!” लेकिन जब उसकी नज़र नीचे अपने पतले और बदसूरत पैरों पर पड़ी, तो वह निराश हो गया और बोला, “अरेरे! भगवान ने मुझे ऐसे बदसूरत और पतले पैर क्यों दिए होंगे? ये मेरे शरीर पर ज़रा भी अच्छे नहीं लगते।”
इतने में ही जंगल के शिकारी कुत्तों के भौंकने की आवाज़ सुनाई दी। सोनू जान बचाने के लिए भागा। अपने पतले पैरों की मदद से वह बहुत तेज़ी से दौड़कर कुत्तों से काफी आगे निकल गया। लेकिन रास्ते में काँटेदार झाड़ियाँ आ गईं। दौड़ते समय सोनू के लंबे सींग झाड़ी की डालियों में उलझ गए। वह लाख कोशिशों के बाद भी निकल नहीं पाया। कुत्ते नज़दीक आ रहे थे। सोनू समझ गया कि जिन्हें वह बदसूरत पैर मानता था, उन्होंने उसकी जान बचाई थी; लेकिन जिन सींगों पर उसे घमंड था, वही उसकी मौत का कारण बन गए।