एक सुंदर वन में गजराज नाम का एक घमंडी हाथी रहता था। वह अपने आकार और असीम शक्ति के कारण जंगल के छोटे जानवरों, जैसे खरगोश और बंदर का मज़ाक उड़ाता था। वह कहता, “मेरे जैसा ताक़तवर कोई नहीं है!”
चतुर खरगोश और बंदर ने एक दिन उसे विनम्रता सिखाने का निर्णय लिया। वन के बीच एक नदी बहती थी और नदी के उस पार एक सुंदर आम का बगीचा था। नदी के तेज़ बहाव को पार करके बगीचे से आम तोड़कर लाने की एक प्रतियोगिता रखी गई।
हाथी भारी होने के कारण नदी तो पार कर गया, लेकिन वह ऊँचे आम के पेड़ पर चढ़कर आम नहीं तोड़ सका। बंदर नदी पार नहीं कर सकता था, लेकिन पेड़ पर चढ़ने में होशियार था। अंत में हाथी ने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी पार कराई और बंदर ने पेड़ से आम तोड़कर दिए।
खरगोश ने नीचे खड़े होकर सभी आम इकट्ठे किए। तीनों के सहयोग से वे विजेता बने। घमंडी हाथी समझ गया कि हर जीव के पास कोई न कोई विशेष गुण या कला होती है और मिलकर काम करने से ही जीत होती है।