एक सुंदर तालाब में हंसों का एक झुंड रहता था। उस झुंड में एक बूढ़ा और अत्यंत बुद्धिमान हंस रहता था। तालाब के किनारे एक छोटा सा बेल (लता) का पौधा उगने लगा। बूढ़े हंस ने अन्य हंसों को चेतावनी दी, “मित्रों! इस बेल को अभी काट डालो। भविष्य में यह बड़ी होगी और शिकारी इस पर चढ़कर हमें जाल में फँसाएगा।”
लेकिन युवा हंसों ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। धीरे-धीरे बेल बड़ी हो गई और पेड़ के तने से लिपटकर मज़बूत बन गई। एक दिन शिकारी आया और बेल का सहारा लेकर पेड़ पर चढ़ गया तथा तालाब के पास बड़ा जाल बिछा दिया।
शाम को जब सभी हंस वापस लौटे तो वे जाल में फँस गए। वे रोने लगे और बूढ़े हंस से माफ़ी माँगने लगे। बुद्धिमान हंस ने एक तरकीब बताई, “जब शिकारी सुबह आए तो सभी मरे होने का नाटक करना। वह हमें ज़मीन पर रख देगा। जब मैं सीटी बजाऊँ, तब सभी एक साथ उड़ जाना।”
सुबह शिकारी ने मरा हुआ समझकर सभी हंसों को ज़मीन पर रख दिया। सीटी बजते ही सभी हंस आकाश में उड़ गए। हंसों ने बूढ़े हंस की चतुराई की तारीफ़ की और बड़ों की बात मानने का वचन दिया।