एक सुंदर और शांत गाँव में ‘आरव’ नाम का एक छोटा और समझदार बालक अपने परिवार के साथ रहता था। आरव पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार था, लेकिन कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर उदास हो जाता था और अपनी कमियों की शिकायत किया करता था। यदि उसे अपनी पसंद का खिलौना न मिलता या खेलने का समय कम मिलता, तो वह उदास हो जाता था।
एक गर्मी की सुहानी रात में गाँव का वातावरण बहुत ही मनमोहक था। आकाश में पूर्णिमा का चाँद चमक रहा था और अनगिनत तारे चमकदार हीरों की तरह जगमगा रहे थे। आरव घर की छत पर अपनी दादी माँ के साथ चारपाई पर बैठा था। दादी माँ ने आरव के चेहरे पर खामोशी देखकर प्यार से पूछा, “बेटा आरव! आज तुम्हारा चेहरा इतना उदास क्यों है?”
आरव ने कहा, “दादी माँ! मेरे दोस्त के पास एक बड़ा कंप्यूटर गेमसेट है, लेकिन मेरे पास नहीं है। मेरे पास कई खिलौने नहीं हैं!”
दादी माँ मुस्कुराईं और आरव का हाथ पकड़कर ऊपर जगमगाते आकाश की ओर इशारा किया। दादी माँ ने कहा, “बेटा आरव! ज़रा आसमान की तरफ देखो, कितने सुंदर तारे चमक रहे हैं। क्या तुम जानते हो कि जो इंसान अपने पास उपलब्ध साधनों के लिए धन्यवाद देना सीख जाता है, उसका दिल इन तारों की तरह चमकदार बन जाता है?”
आरव ने उत्सुकता से पूछा, “धन्यवाद देना यानी क्या दादी माँ?”
दादी माँ ने बहुत ही प्यार से समझाया, “धन्यवाद देना यानी ‘कृतज्ञता’ (Gratitude)। हमारे जीवन में रोज हमें जो अनमोल उपहार मिलते हैं — जैसे पीने को साफ पानी, खाने को गर्म भोजन, रहने को सुंदर घर, प्यार करने वाले माता-पिता, सुंदर प्रकृति और पढ़ने को स्कूल — इन सब चीजों के लिए ईश्वर और प्रकृति का आभार व्यक्त करना। जो इंसान शिकायतों को छोड़कर अपने पास मौजूद चीजों के लिए धन्यवाद देता है, वह दुनिया का सबसे सुखी इंसान बन जाता है।”
दादी माँ ने आरव से एक छोटा सा अभ्यास करने को कहा, “आज रात सोने से पहले तुम 5 ऐसी बातें याद करो जिनके लिए तुम ईश्वर और अपने परिवार के प्रति आभारी हो।”
आरव ने आँखें बंद कीं और सोचने लगा:
1. “मैं आभारी हूँ कि मेरे पास मुझे प्यार करने वाले माता-पिता और दादी माँ हैं।”
2. “मैं आभारी हूँ कि मुझे रोज माँ के हाथ का स्वादिष्ट भोजन मिलता है।”
3. “मैं आभारी हूँ कि मेरे पास पढ़ने के लिए सुंदर पुस्तकें हैं।”
4. “मैं आभारी हूँ कि मुझे सांस लेने के लिए ताज़ा हवा और सुंदर वातावरण मिला है।”
5. “मैं आभारी हूँ कि मेरे पास खेलने के लिए प्यारे दोस्त हैं।”
जैसे ही आरव ने मन ही मन इन 5 बातों के लिए धन्यवाद दिया, वैसे ही उसके मन की सारी उदासी और असंतोष गायब हो गए! उसके हृदय में एक अनूठा आनंद और शांति भर गई। आरव ने दादी माँ को गले से लगा लिया और कहा, “दादी माँ! आज मुझे समझ आ गया कि मेरे पास जो है, वही मेरी सबसे बड़ी संपत्ति है!”
तब से आरव रोज रात को कृतज्ञता व्यक्त करना कभी नहीं भूलता था। वह हमेशा खुशमिजाज और संतोषी बन गया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि शिकायतों को छोड़कर अपने पास मौजूद सुखों के लिए ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए। कृतज्ञता ही सच्चे सुख की कुंजी है।