एक छोटे से गाँव में रामजी नाम का एक दयालु किसान रहता था। रामजी के पास पवन नाम का एक मजबूत और वफ़ादार घोड़ा था। रामजी पवन को अपने परिवार के सदस्य की तरह रखता था और उसे कभी मारता या कष्ट नहीं देता था।
पवन घोड़ा भी किसान रामजी के सभी कामों में मदद करता था। एक दिन रामजी खेत से फसल भरकर गाड़ी लेकर घर लौट रहा था। रास्ते में अचानक मौसम बिगड़ गया और नदी में ज़ोरदार बाढ़ आ गई।
पुल पार करते समय गाड़ी का पहिया कीचड़ में फँस गया और पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ने लगा। रामजी घबरा गया। पवन घोड़े ने मालिक का संकट देखकर अपनी पूरी ताकत लगा दी। पवन ने हिम्मत नहीं हारी और ज़ोर लगाकर गाड़ी को कीचड़ से बाहर खींच लिया और रामजी को सुरक्षित किनारे पहुँचा दिया।
रामजी ने पवन को गले लगा लिया और प्यार से सहलाया। किसान की दया और घोड़े की वफ़ादारी का उदाहरण पूरे गाँव में प्रसिद्ध हो गया।