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वाचाल कछुआ और दो हंस (The Talkative Tortoise and Two Geese)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: कंबूग्रीव कछुआ, संकट, विकट

वाचाल कछुआ और दो हंस (The Talkative Tortoise and Two Geese)
અક્ષરનું માપ:

एक तालाब में कंबूग्रीव नाम का एक कछुआ रहता था। वह बहुत वाचाल (बातूनी) था और उसे लगातार बोलने की आदत थी। उसी तालाब में संकट और विकट नाम के दो सुंदर हंस भी रहते थे। वे तीनों अच्छे मित्र बन गए थे।

एक वर्ष सूखा पड़ा और तालाब का पानी सूखने लगा। हंसों ने किसी दूसरे तालाब पर जाने का निश्चय किया और कछुए को भी साथ ले जाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने लकड़ी की एक छड़ी ली। दोनों हंसों ने लकड़ी के सिरों को अपनी चोंच से पकड़ा और कछुए से बीच में से मुँह द्वारा लकड़ी को पकड़े रखने के लिए कहा। हंसों ने सख्त चेतावनी दी, “यात्रा के दौरान बिल्कुल मत बोलना, नहीं तो नीचे गिर जाओगे।”

जब वे आकाश में उड़ रहे थे, तब नीचे गाँव के लोग यह दृश्य देखकर चिल्लाने लगे और हँसने लगे। लोगों की आवाज़ सुनकर कंबूग्रीव से रहा नहीं गया। वह पूछने के लिए जैसे ही बोलने लगा, “ये लोग क्यों शोर मचा रहे हैं?”, वैसे ही उसके मुँह से लकड़ी छूट गई और वह पत्थर पर गिरकर मारा गया।कछुआ लकड़ी को मुँह में दबाकर हंसों के साथ उड़ रहा था। गाँव वालों को देखकर जैसे ही उसने मुँह खोला, वह ज़मीन पर गिरकर मर गया।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

बेवजह और ज़रूरत से ज़्यादा बोलना हानिकारक साबित होता है। सही समय पर मौन रहना ही हितकारी होता है।