एक गाँव में गर्धभराज नाम का एक गधा रहता था। उसका मालिक धोबी उस पर भारी बोझ लादता था। एक दिन गधे को जंगल में एक मरे हुए शेर की खाल (चमड़ी) मिली। गधे के मन में एक कुटिल विचार आया।
उसने वह शेर की खाल अपने शरीर पर ओढ़ ली। रात में वह गाँव के हरे-भरे खेतों में चरने गया। खेत के रखवाले और गाँव के लोग उसे शेर समझकर डर के मारे भाग खड़े हुए। गधा बहुत खुश हुआ और खुद को सचमुच जंगल का राजा समझने लगा।
एक रात जब वह खेत में मज़ा लेते हुए चर रहा था, तभी पास की पहाड़ी से दूसरे गधों के रेंकने की आवाज़ आई। आवाज़ सुनकर यह गधा भी अपने आवेश को रोक न सका और खुद भी ज़ोर-ज़ोर से रेंकने लगा।
उसकी आवाज़ सुनते ही गाँव के लोग समझ गए कि यह कोई शेर नहीं बल्कि शेर की खाल ओढ़े हुए गधा है! लोग लाठियाँ लेकर आए और गधे को पीट-पीटकर खेत से भगा दिया। गधे का झूठा दिखावा बेनक़ाब हो गया।