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नमक का व्यापारी और कामचोर गधा (The Salt Merchant and his Donkey)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: धनजी व्यापारी, पप्पू गधा

नमक का व्यापारी और कामचोर गधा (The Salt Merchant and his Donkey)
અક્ષરનું માપ:

एक गाँव में धनजी नाम का एक दयालु व्यापारी रहता था। धनजी के पास पप्पू नाम का एक गधा था। धनजी प्रतिदिन गधे की पीठ पर नमक की बोरियाँ लादकर बाज़ार में बेचने जाता था। रास्ते में एक छोटी नदी पार करनी पड़ती थी।

एक दिन नदी पार करते समय पप्पू गधे का पैर फिसल गया और वह पानी में गिर गया। जब वह खड़ा हुआ तो नमक पानी में घुल जाने के कारण बोरियाँ बिल्कुल हल्की हो गईं। गधा बहुत खुश हुआ।

दूसरे दिन गधे ने कामचोरी की चालाकी दिखाते हुए जानबूझकर नदी में डुबकी लगा दी और फिर भार हल्का कर लिया। व्यापारी धनजी गधे की यह चालाकी समझ गया। उसने गधे को सबक सिखाने का निश्चय किया।

तीसरे दिन धनजी ने नमक के बजाय गधे की पीठ पर सूखे रुई की बोरियाँ लाद दीं। गधा नदी के पास पहुँचा और अपनी पुरानी आदत के अनुसार जानबूझकर पानी में बैठ गया। लेकिन रुई ने पानी सोख लिया और भार दस गुना बढ़ गया! गधे के लिए भार उठाना मुश्किल हो गया। गधे को अपनी कामचोरी का बहुत पछतावा हुआ और उसने फिर कभी चालाकी नहीं की।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

कामचोरी और चालाकी हमेशा अपना ही नुकसान करती है।