भारत के इतिहास में कुछ नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपनी सादगी, ईमानदारी और देशसेवा के बल पर देशवासियों के दिलों में स्थायी स्थान बनाया। लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ही महान जननेता थे।
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक देश का कुशल नेतृत्व किया।
बचपन और परिवार
शास्त्री जी का बचपन का नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। उनके पिता शारदा प्रसाद शिक्षक थे। बचपन में ही पिता के निधन के बाद उनकी माता रामदुलारी देवी ने कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया।
शिक्षा और “शास्त्री” उपाधि
उन्होंने हरिश्चंद्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की। काशी विद्यापीठ से स्नातक होने पर उन्हें “शास्त्री” की उपाधि मिली, जो जीवनभर उनके नाम का अभिन्न अंग बन गई।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
शास्त्री जी भारत सेवक संघ से जुड़े और गांधी जी के विचारों का अनुसरण किया। 1921 के असहयोग आंदोलन और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया और कई बार जेल की सजा काटी।
रेल मंत्री और प्रशासनिक कुशलता
स्वतंत्र भारत में वे उत्तर प्रदेश के मंत्री और बाद में केंद्रीय रेल मंत्री बने। 1956 में अरीयालुर रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जो भारतीय राजनीति में नैतिकता का अद्वितीय उदाहरण है।
प्रधानमंत्री पद और 1965 का युद्ध
1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद वे देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय उन्होंने सेना और किसानों का उत्साह बढ़ाते हुए “जय जवान, जय किसान” का अमर नारा दिया।
उपसंहार
11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका अचानक निधन हुआ। 1966 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।