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दो कुत्ते और रोटी (Two Dogs and the Bread)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: दो कुत्ते, चतुर बंदर

दो कुत्ते और रोटी (Two Dogs and the Bread)
અક્ષરનું માપ:

एक गली में दो कुत्ते रहते थे। एक दिन उन्हें एक बड़ी और ताज़ी रोटी मिली। दोनों कुत्ते भूखे थे, इसलिए दोनों रोटी पर टूट पड़े और ज़ोर-ज़ोर से भौंकते हुए लड़ने लगे: “यह मेरी रोटी है!”, “नहीं, यह मैंने पहले देखी थी, यह मेरी है!”

उसी समय पेड़ की डाल पर बैठा एक चतुर बंदर यह लड़ाई देख रहा था। उसे मुफ़्त में रोटी खाने का मौक़ा दिखाई दिया। वह नीचे आया और बोला, “दोस्तों, लड़ो मत! लड़ने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। लाओ, मैं न्याय करने के लिए इस रोटी के दो बराबर टुकड़े कर देता हूँ।”

बंदर एक तराज़ू ले आया। उसने रोटी के दो टुकड़े करके तराज़ू में रख दिए। एक तरफ का हिस्सा भारी हो गया, तो बंदर ने कहा, “अरे रे! इस तरफ का टुकड़ा बड़ा है, लाओ मैं इसे बराबर कर देता हूँ।” ऐसा कहकर उसने उसमें से एक बड़ा निवाला (टुकड़ा) खा लिया।

अब दूसरी तरफ का पलड़ा झुक गया, तो बंदर ने उसमें से भी एक निवाला खा लिया। इस तरह वह बारी-बारी से दोनों तरफ के टुकड़े तोड़-तोड़कर खाने लगा। कुत्ते समझ गए कि बंदर उन्हें धोखा दे रहा है। उन्होंने कहा, “बंदर भाई, अब हमें न्याय नहीं चाहिए, हमारी बची हुई रोटी वापस दे दो।” बंदर ने हँसते-हँसते आख़िरी टुकड़ा मुँह में रखते हुए कहा, “यह तो मेरी मेहनत की फ़ीस है!” ऐसा कहकर वह पेड़ पर चढ़ गया।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

आपस की लड़ाई में हमेशा तीसरा पक्ष फ़ायदा उठा जाता है, इसलिए लड़ने के बजाय प्यार से समझौता कर लेना चाहिए।