एक सुंदर उपवन (बगीचे) में चुटकी नाम की एक छोटी और बहुत ही मेहनती गिलहरी रहती थी। उसी उपवन में आम का एक बड़ा प्राचीन पेड़ था। गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण आम का पेड़ सूखने लगा था।
दूसरे आलसी जानवर तो सूखते हुए पेड़ को छोड़कर दूसरी जगह चले गए, लेकिन चुटकी गिलहरी ने हिम्मत नहीं हारी। वह रोज़ पास के छोटे तालाब से अपने छोटे से मुँह में और पत्तों में पानी भरकर लाती और आम की जड़ों में डालती थी।
चुटकी की लगातार मेहनत और देखभाल से कुछ ही हफ़्तों में आम के पेड़ पर हरे-भरे पत्ते और सुंदर सुगंधित आम उगने लगे। मानसून आते ही पूरा आम का पेड़ मीठे और सुनहरे आमों से लद गया।
आम के पेड़ ने चुटकी गिलहरी को सबसे मीठे आम खाने को दिए। जब आलसी जानवर वापस लौटे तो उन्हें पछतावा हुआ। चुटकी ने साबित कर दिया कि निरंतर परिश्रम से असंभव काम भी संभव हो जाता है।