બાળ કવિતા

नन्ही मेरी गुड़िया (Nanhi Meri Gudiya)

मेरी नन्ही गुड़िया बोलती नहीं,
मीठी-मीठी आँखें खोलती नहीं!

सोने के पलंग पर उसे बिठाऊँ,
चाँदी के बर्तनों में खाना खिलाऊँ!

फिर भी मेरी गुड़िया हँसती नहीं,
चॉकलेट दूँ, तब भी खेलती नहीं!

प्यार करूँ तो मुस्कुरा जाती,
मेरी नन्ही गुड़िया सबसे प्यारी लगती!

नन्ही मेरी गुड़िया (Nanhi Meri Gudiya)