ऋषि धौम्य के आश्रम में उपमन्यु नाम का एक छोटा बाल शिष्य रहता था। गुरुजी ने उसे आश्रम की गायें चराने का काम सौंपा था। उपमन्यु पूरा दिन गायों के साथ जंगल में रहता था।
गुरुजी उपमन्यु के धैर्य और संयम की परीक्षा लेना चाहते थे। उन्होंने उपमन्यु को गायों का दूध या जंगल से माँगकर लाया गया अन्न गुरुजी की अनुमति के बिना खाने से मना कर दिया। उपमन्यु ने गुरुजी की आज्ञा का अक्षरशः पालन किया और भूखे पेट भी गायों की सेवा करता रहा।
एक दिन भूख से व्याकुल होकर उपमन्यु ने आक के पत्ते खा लिए, जिससे उसकी आँखों की रोशनी चली गई और वह एक कुएँ में गिर गया। जब गुरुजी ढूँढते हुए आए और उपमन्यु की अविचल गुरुभक्ति देखी, तो उन्होंने अश्विनी कुमारों का आह्वान करके उपमन्यु की आँखों की रोशनी वापस लौटाई और उसे सर्व विद्याओं का ज्ञान दिया। गुरु पूर्णिमा पर उपमन्यु की यह कहानी शिष्य की निष्ठा का प्रतीक है।