एक सुंदर जंगल में चीकू नाम का एक शरारती खरगोश और मिलू नाम का एक धीमा कछुआ रहता था। खरगोश को अपनी तेज़ रफ्तार पर बहुत घमंड था। वह हमेशा कछुए की धीमी चाल का मज़ाक उड़ाता रहता था।
एक दिन खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, “मिलू, आओ हम दोनों के बीच दौड़ की प्रतियोगिता करें। देखते हैं, कौन जीतता है!” कछुए ने विनम्रतापूर्वक यह चुनौती स्वीकार कर ली। जंगल के दूसरे जानवर भी यह दौड़ देखने के लिए इकट्ठा हो गए।
दौड़ शुरू हुई। खरगोश बहुत तेज़ी से दौड़ता हुआ काफी आगे निकल गया। आधे रास्ते पर पहुँचकर उसने पीछे देखा, तो कछुआ कहीं दिखाई नहीं दिया। खरगोश ने सोचा, “कछुए को यहाँ तक पहुँचने में तो शाम हो जाएगी। क्यों न मैं इस हरे-भरे पेड़ की छाया में थोड़ी देर आराम कर लूँ?” यह सोचकर वह पेड़ के नीचे लेट गया और ठंडी हवा में उसे गहरी नींद आ गई।
दूसरी ओर, मिलू कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे, लेकिन लगातार अपनी मंज़िल की ओर बढ़ता रहा। वह सोए हुए खरगोश के पास से निकलकर सबसे पहले दौड़ की समाप्ति रेखा तक पहुँच गया। सभी जानवरों ने ज़ोरदार तालियाँ बजाकर उसका स्वागत किया। शोर सुनकर खरगोश की नींद खुली। उसने देखा कि कछुआ दौड़ जीत चुका था। यह देखकर खरगोश को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे बहुत शर्म आई और उसने उस दिन के बाद कभी घमंड नहीं किया।