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पुण्यशाली गाय और बाघ (The Kind Cow and the Tiger)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: गाय मंगला, बाघ भगदड़

पुण्यशाली गाय और बाघ (The Kind Cow and the Tiger)
અક્ષરનું માપ:

एक सुंदर हरे-भरे जंगल के पास स्थित गाँव में मंगला नाम की एक गाय रहती थी। वह बहुत ही दयालु, शांत और बेहद ईमानदार थी। घर पर उसका एक छोटा और प्यारा बछड़ा था, जिससे वह बहुत प्यार करती थी।

एक दिन मंगला जंगल में घास चरने गई। चरते-चरते वह काफी अंदर चली गई, जहाँ एक भूखा बाघ लंबे समय से शिकार की राह देख रहा था। बाघ गरजकर बोला, “आज बहुत दिनों बाद स्वादिष्ट भोजन मिलेगा। गाय! अब मैं तुम्हें खा जाऊँगा।”

मंगला घबराई नहीं, बल्कि उसने बाघ से विनती की: “बाघ भाई, मुझे आपका भोजन बनने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन घर पर मेरा छोटा बच्चा भूखा है और मेरा इंतज़ार कर रहा है। कृपया मुझे एक घंटे की मोहलत दे दीजिए। मैं घर जाकर उसे आख़िरी बार पेट भरकर दूध पिला आऊँ और फिर आपके भोजन के रूप में वापस लौट आऊँगी।” बाघ हँसा और बोला, “कोई एक बार आज़ाद होने के बाद वापस आता है क्या?” गाय ने गंभीरता से कहा, “मैं सत्य वचन देती हूँ, मैं निश्चित रूप से वापस आऊँगी।”

गाय की बात पर विश्वास करके बाघ ने उसे जाने दिया। गाय घर गई, अपने बच्चे को बहुत दुलार किया, दूध पिलाया और आपस में मिल-जुलकर रहने की सीख दी। इसके बाद वह अपने दिए वचन के अनुसार जंगल में बाघ के पास वापस आ गई। बाघ गाय की इस अनोखी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी को देखकर दंग रह गया। उसका हृदय-परिवर्तन हो गया। उसने गाय से कहा, “बहन, तुम्हारी जैसी पवित्र गाय को खाकर मैं पाप का भागी नहीं बनूँगा। तुम सकुशल घर जाओ।”

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

सत्य और वचनपालन की शक्ति से क्रूर से क्रूर शत्रु का हृदय भी पिघल जाता है और जीत हमेशा धर्म की ही होती है।