बहुत समय पहले, हेमलिन नाम का एक सुंदर नगर था। लेकिन उस नगर में हज़ारों चूहों का बड़ा आतंक फैला हुआ था। रसोई में, अलमारी में, गलियों में, हर जगह चूहों का ही जमावड़ा रहता था। नगर के लोग बहुत परेशान थे और कोई भी उपाय काम नहीं कर रहा था। नगरसेठ ने घोषणा की कि जो भी चूहों के इस आतंक से मुक्ति दिलाएगा, उसे इनाम में सोने के सौ सिक्के दिए जाएँगे।
एक दिन वहाँ एक जादुई बाँसुरीवाला आया। उसने बाँसुरी पर एक अद्भुत धुन बजानी शुरू की। वह सुर सुनकर नगर के सभी चूहे मंत्रमुग्ध होकर बाँसुरीवाले के पीछे दौड़ने लगे। बाँसुरीवाला बजाते-बजाते नगर के बाहर स्थित नदी की ओर बढ़ा और सभी चूहे नदी में डूब गए। नगरवासियों ने राहत की साँस ली, लेकिन नगरसेठ लालच में आ गए और उन्होंने बाँसुरीवाले को इनाम देने से मना कर दिया।
इस अपमान से क्रोधित होकर बाँसुरीवाले ने एक बार फिर बाँसुरी बजाई। इस बार बाँसुरी का सुर अनोखा और बच्चों को आकर्षित करने वाला था। नगर के सभी छोटे बच्चे हँसते और खेलते हुए बाँसुरीवाले के पीछे जाने लगे। माता-पिता की आँखों के सामने ही बाँसुरीवाला सभी बच्चों को लेकर एक रहस्यमयी पहाड़ की ओर चला गया और वहाँ अदृश्य हो गया। नगरसेठ को अपनी भूल का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।