एक ग़रीब मछुआरा राघव समुद्र किनारे एक छोटी सी झोपड़ी में अपनी पत्नी मंगला के साथ रहता था। वह हर दिन मछलियाँ पकड़कर अपना गुज़र-बसर करता था। एक दिन उसके जाल में एक चमकती हुई सुनहरी मछली आई। वह मछली जादुई थी और इंसान की आवाज़ में बोली, “हे भले मछुआरे, मुझे आज़ाद कर दो! मैं तुम्हारी सारी इच्छाएँ पूरी करूँगी।”
राघव ने दया खाकर मछली को समुद्र में छोड़ दिया। घर आकर उसने अपनी पत्नी को यह बात बताई। मंगला लालची थी, उसने राघव को वापस जाने के लिए कहा और मछली से एक सुंदर बड़ा घर माँगने के लिए भेजा। राघव समुद्र किनारे गया और उसने मछली से प्रार्थना की। मछली ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। लेकिन मंगला का लालच यहीं नहीं रुका।
इसके बाद उसने एक सुंदर महल, फिर रानी बनने और अंत में पूरे सूर्य और चंद्रमा की स्वामिनी (मालकिन) बनने की माँग की। जब राघव आख़िरी बार इस माँग के साथ मछली के पास गया, तो मछली ने क्रोधित होकर सब कुछ वापस ले लिया। जब राघव घर वापस लौटा, तो वहाँ आलिशान महल के बजाय उनकी वही पुरानी मिट्टी की झोपड़ी खड़ी थी।