एक बड़े तालाब में सैकड़ों मेंढक बहुत ही शांति से रहते थे। वे बिना किसी नियंत्रण के स्वतंत्र रूप से पानी में कूदते और खेलते थे। लेकिन समय बीतने के साथ उन्हें लगा कि अन्य जंगली जीवों की तरह उनका कोई शासक नहीं है। इसलिए उन्होंने वनदेवता से प्रार्थना की कि वे उनके पास एक शक्तिशाली राजा भेजें।
वनदेवता उनकी मूर्खता पर हँसे और उन्होंने तालाब में लकड़ी का एक बड़ा लट्ठा (टुकड़ा) फेंक दिया। पहले तो मेंढक उससे डर गए, लेकिन बाद में उन्होंने देखा कि वह तो हिल-डुल भी नहीं सकता। वे उस पर कूदने लगे और वनदेवता से फिर शिकायत की, “यह तो बिल्कुल आलसी राजा है! हमें कोई सक्रिय राजा दीजिए।”
वनदेवता क्रोधित हो गए और उन्होंने तालाब में एक भूखे बगुले को राजा बनाकर भेज दिया। बगुले ने आते ही तुरंत अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया और रोज़ मेंढकों को पकड़-पकड़कर खाना शुरू कर दिया। मेंढकों को अपनी भूल का एहसास हुआ, लेकिन अब बचने का कोई रास्ता नहीं बचा था।