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राजा विक्रम और दयालु किसान (King Vikram and the Generous Farmer)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: राजा विक्रमादित्य, दयालु किसान (रामजी)

राजा विक्रम और दयालु किसान (King Vikram and the Generous Farmer)
અક્ષરનું માપ:

प्रजाप्रिय राजा विक्रमादित्य अक्सर एक साधारण यात्री का वेश धारण करके अपने राज्य में घूमा करते थे, ताकि वे प्रजा की सच्ची स्थिति जान सकें। एक बार शाम ढलते-ढलते राजा एक छोटे से ग़रीब गाँव में आ पहुँचे।

वे एक झोपड़ी के पास गए जहाँ रामजी नाम का एक ग़रीब किसान रहता था। राजा ने विनती की, “भाई! मैं दूर से आ रहा एक थका हुआ यात्री हूँ, क्या मुझे आज की रात ठहरने की जगह और भोजन मिल सकेगा?” किसान ने बिना किसी हिचकिचाहट के पूरे आदर के साथ राजा को अंदर बुलाया।

किसान के घर में केवल दो ही रोटियाँ थीं। उसने खुद भूखा रहकर वे सभी रोटियाँ और ताज़ा दूध उस अनजान यात्री को खिला दिया। राजा किसान की निःस्वार्थ भक्ति और उदारता देखकर गदगद हो गए।

अगले दिन सुबह राजा विक्रमादित्य ने अपना असली परिचय दिया और किसान रामजी को राजमहल बुलाकर सोने के सिक्के और उपजाऊ ज़मीन इनाम में दी। पूरे राज्य में उस दयालु किसान की प्रशंसा हुई।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

निःस्वार्थ भाव से की गई अतिथि सेवा और दयालुता का फल हमेशा शुभ और महान होता है।