एक विशाल पहाड़ी वन क्षेत्र में एक बूढ़ा गिद्ध अपने इलाक़े पर घमंड करता था। वह पहाड़ के सबसे ऊँचे सूखे पेड़ पर बैठता था और छोटे पक्षियों को वहाँ बैठने नहीं देता था। एक दिन एक चतुर कौआ उस पेड़ पर आकर बैठ गया।
गिद्ध ने गुस्से में कहा, “भाग जा यहाँ से कौए! यह मेरा क्षेत्र है।” कौए ने शांतिपूर्वक कहा, “गिद्ध भाई! यह जंगल और पेड़ कुदरत की देन हैं। अगर हम मिल-बाँटकर रहेंगे, तो एक-दूसरे की मुसीबत में मदद कर पाएँगे।”
एक रात एक शिकारी ने उस पेड़ के नीचे ज़हरीला भोजन रखकर जाल बिछा दिया। गिद्ध भूखा था और वह भोजन देखकर नीचे उतरने ही वाला था। कौए ने समय सूझ-बूझ दिखाते हुए ज़ोर-ज़ोर से काँव-काँव करना शुरू कर दिया और गिद्ध को चेतावनी दी।
गिद्ध ने कौए की चेतावनी सुनकर अपनी जान बचा ली। उसे समझ आ गया कि कौआ सही कह रहा था। उस दिन से दोनों मिल-बाँटकर रहने लगे और उनके बीच पक्की दोस्ती हो गई।