एक विशाल नदी के किनारे शंभू नाम का एक ग़रीब मछुआरा रहता था। वह हर दिन नदी से मछलियाँ पकड़कर अपना गुज़र-बसर करता था। एक सुबह उसने नदी में जाल फेंका और जब जाल को बाहर खींचा, तो उसमें मछली के बजाय एक जगमगाता हुआ हीरों से जड़ा सोने का हार निकला।
हार देखकर शंभू हैरान रह गया। वह समझ गया कि यह कोई साधारण हार नहीं है, बल्कि राजमहल की रानी का क़ीमती हार है जो नदी में बहकर आ गया होगा। शंभू के मन में ज़रा भी लालच नहीं आया। वह सीधा राजा के दरबार में पहुँचा।
शंभू ने राजा को हार सौंपते हुए कहा, “महाराज! यह हार मुझे नदी से मिला है, यह आपकी अमानत है।” राजा शंभू की अद्भुत सच्चाई और ईमानदारी देखकर बहुत प्रसन्न हुए।
राजा ने शंभू को सोने के सौ सिक्के और नदी के किनारे एक बड़ा घर इनाम में दिया। शंभू ने साबित कर दिया कि ईमानदारी का फल हमेशा मीठा और अमूल्य होता है।