एक विशाल और घने जंगल में ‘शेरू’ नाम का एक बहुत ही शक्तिशाली और घमंडी शेर रहता था। शेरू शेर को अपने शरीर की ताकत और तीखे पंजों पर बहुत घमंड था। वह दिन भर ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ मारकर जंगल के छोटे-बड़े जानवरों को डराता था और खुद को संसार का सबसे सर्वशक्तिमान जीव मानता था।
उसी जंगल में ‘गजराज’ नाम का एक बहुत ही वृद्ध, शांत और अत्यंत बुद्धिमान हाथी रहता था। गजराज हाथी अपने ज्ञान, नम्र स्वभाव और सभी जानवरों के प्रति प्रेम के लिए पूरे जंगल में आदरणीय था।
एक दिन शेरू शेर घमंड में अंधा होकर गजराज हाथी के पास गया और दहाड़कर बोला, “अरे गजराज! तुम इतने सुस्त क्यों चलते हो? इस जंगल में मुझसे ज्यादा ताकतवर कोई नहीं है। तुम मेरे सामने झुककर मुझे प्रणाम करो!”
गजराज हाथी ने शांति से मुस्कुराकर कहा, “राजा शेरू! शारीरिक बल ही सब कुछ नहीं होता। सच्चा बल बुद्धि, धैर्य और नम्रता में होता है। जो अपनी ताकत का घमंड करता है, वह जल्दी ही मुसीबत में फँस जाता है।”
शेरू शेर ने हाथी की बात को हँसी में उड़ा दिया और कहा, “मैं कभी मुसीबत में नहीं फँस सकता!”
कुछ दिनों बाद जंगल में शिकारी आए। शिकारियों ने जंगल के रास्ते पर लोहे की मजबूत जाल बिछा रखी थी। शेरू शेर घमंड में इधर-उधर दौड़ रहा था कि अचानक शिकारियों के जाल में फँस गया!
शेरू शेर ने अपनी पूरी ताकत लगाकर जाल तोड़ने की कोशिश की, लेकिन जाल बहुत मजबूत था। शेरू जितना जोर लगाता, जाल उतना ही कसता जाता। शेरू शेर डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से मदद के लिए चिल्लाने लगा, लेकिन कोई जानवर आगे नहीं आया।
अंत में गजराज हाथी वहाँ पहुँचा। गजराज ने अपनी लंबी और शक्तिशाली सूँड से पेड़ की भारी डाल उठाकर जाल का ढांचा तोड़ दिया और शेरू शेर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जब शिकारी दौड़े आए, तो गजराज हाथी ने चिंघाड़ मारकर शिकारियों को जंगल से भगा दिया।
शेरू शेर शर्म से पानी-पानी हो गया। उसने गजराज हाथी से हाथ जोड़कर माफी माँगी, “दादा गजराज! मुझे मेरा घमंड समझ आ गया है। आज मुझे समझ आया कि ताकत से कहीं अधिक बड़ी बुद्धि और नम्रता होती है।”
यह कहानी हमें सिखाती है कि अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। नम्रता और बुद्धि ही सच्ची शक्ति है।